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भाजपा सत्ता प्राप्ति के लिए कर रही एसआईआर का इस्तेमाल

जाति और धर्म के नाम पर काटे जा रहे हैं वोट : राव नरेंद्र सिंह

Satyakhabarindia

 

सत्य खबर हरियाणा

Congress and SIR : एसआईआर को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र ने कहा कि हम प्रदेश में एसआईआर को लेकर अभियान चलाएंगे। जिसके तहत हम अपने बीएलए 1 और बीएलए 2 की ड्यूटी लगाएंगे। अगर उनके बूथ पर कोई भी बदलाव हुआ है तो उसकी सूचना आगे दें। जैसे किसी की शादी हुई है, शादी के बाद परिवार में महिला सदस्य आईं है या किसी की मौत हो गई हो। ताकी सही तरीके से वोट बने और अगर वोट काटे जाएं तो वह भी गलत न कटे।

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उन्होंने कहा कि हम एसआईआर के खिलाफ नहीं है लेकिन किसी को भी गलत तरीके से वोट नहीं कटना चाहिए। ऐसा न हो की भाजपा द्वारा जाति और धर्म के नाम पर वोट काट दिए जाएं। बिहार और बंगाल में एसआईआर हुआ, जहां गलत तरीके से लाखों वोट काट दिए गए। उन्होंने कहा कि बीजेपी सत्ता प्राप्ति के लिए इसका इस्तेमाल कर रही है जो हम होने नहीं देंगे। हम अब हरियाणा में ऐसा नहीं होने देंगे।

कांग्रेस इस प्रक्रिया के जरिए अपने संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने की योजना पर काम कर रही है। पार्टी कार्यकर्ताओं को मतदाता सूची के पुनरीक्षण में शामिल कर जमीनी नेटवर्क को मजबूत करने की रणनीति तैयार की जा रही है। एसआईआर का उद्देश्य भले ही मतदाता सूची को अपडेट करना हो जैसे नए वोटर्स जोड़ना, मृत या स्थानांतरित लोगों के नाम हटाना और डुप्लीकेट एंट्री खत्म करना लेकिन कांग्रेस इसे एक संवेदनशील प्रक्रिया मान रही है, जिसमें जरा-सी चूक भी बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकती है।

कांग्रेस पहले ही मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोप उठाती रही है। राहुल गांधी द्वारा पूर्व में लाखों वोटों में अनियमितता का मुद्दा उठाया जा चुका है। ऐसे में पार्टी ने संकेत दिए हैं कि यदि एसआईआर के दौरान नाम जोड़ने या हटाने में कोई भी गड़बड़ी सामने आती है, तो उसे बड़े स्तर पर उठाया जाएगा। पार्टी का मानना है कि मतदाता सूची में पारदर्शिता की कमी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। इसलिए कांग्रेस इस मुद्दे को राजनीतिक नैरेटिव बनाने और सरकार को घेरने के अवसर के रूप में देख रही है।

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हरियाणा में आगामी चुनावों को देखते हुए मतदाता सूची का सटीक और संतुलित होना सभी दलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। कांग्रेस एसआईआर के जरिए न केवल संभावित गड़बड़ियों पर नजर रखने की रणनीति बना रही है, बल्कि इसे अपने पक्ष में माहौल तैयार करने के अवसर के रूप में भी भुना रही है। स्पष्ट है कि एसआईआर अब सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि हरियाणा की राजनीति में एक बड़ा सियासी टूल बनता जा रहा है, जहां से आने वाले चुनावों की दिशा तय हो सकती है।

 

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